गुरु हमें नहीं गिराते लेकिन हम स्वयं गुरु की नजरों से गिर जाते हैं।।
आचरण से भजन खोला जा सकता है,अनावृत किया जा सकता है।।
माला औषधि है।।
माला शब्द,स्पर्श,रूप,रस, और गंध से जुड़ी है।।
गुरु का उपकरण माला या बेरखा भी भजन प्रकट करता है।।
भजन आते ही संशय,भ्रम आदि मेंढक भाग जाते हैं।।
तंजावुर से प्रवाहित रामकथा छठ्ठे दिन में प्रवेश कर रही है।। कथा आरंभ पर कथा के सार दोहन का संपादन पुस्तक में नीतिन वडगामा ने मानस विश्राम घाट-मथुरा कथा व्यासपीठ को अर्पण करके अपना भाव रखा।गोस्वामी जी ने विनय पत्रिका में एक पद लिखा है वहां से शुरू करते हुए बापू ने कहा कि गोस्वामी जी कहते हैं मुझ में एक भी आचरण नहीं।।गोस्वामी जी हम सब के प्रवक्ता बनकर बोल रहे हैं। हमारे मन को समझ कर कहते हैं। सद्गुरु मन का ज्ञाता भी है निर्माता भी है।।इशु को कौन लोग समझ पाए?बहुत निकट आए लोग भी जो बहुत करीब जाने वाले आठ लोग थे इनमें भी जुडाश बहुत करीब था। लेकिन चंद सिक्कों के लिए इशु को बेच डाला।।भगवान बुद्ध के निकट चार शिष्य थे चारों भी बुद्ध की निंदा पर उतर आए।। यह सिलसिला कायम चला है।।महावीर,कृष्ण,राम को भी कितने पहचान पाए? यह परंपरा है।। हम दावा करते हैं हम करीब है यह बनावटी करीबी का दावा है।। लेकिन घडी बनाने वाले को घड़ी के हर पुर्जों का पता होता है।।सद्गुरु मन का निर्माता भी है।। कोई पल खाली नहीं संग करने वाला निंदा पर चले आता है।। गुरु हमें नहीं गिराते लेकिन हम स्वयं गुरु की नजरों से गिर जाते हैं।।
श्रीमद् भागवत में भजन के लिए कुछ आचरण भी बताए हैं।।तुलसी ने पद में वह आचरण दिखाए हैं आचरण से भजन खोला जा सकता है,अनावृत किया जा सकता है।।भजन तो सब में पड़ा है।
बापू ने आज जाकिर हुसैन को अंजलि देते हुए कहा कि 27 तारीख को मुंबई में प्रार्थना मीटिंग है यह जाकिर हुसैन जी हर एक को ऊंचा दिखाये, यह उनकी खानदानी है।।
रावण ने निवेदन किया है कि तामस देह है भजन नहीं कर सकते।।वो रावण की चालाकी है।विभीषण और कुंभकर्ण भी तामस देह थे।
आपके बच्चों के दफ्तर में रामचरितमानस और गीता रखने से क्या होगा? लेकिन जब समय आएगा तब घटना घटेगी।।
भजन को प्रकट करने के लिए पांच वस्तुओं की जरूरत है एक- एकांत है।।बापू ने कहा मेरा अनुभव है रात को 12 के बाद एकांत श्रेष्ठ होता है ।।विशेष आवाज आती है।। दूसरा जीवन में घटी कोई घटना या प्रिय जन की याद आए और अश्रु आ जाए।। तीसरा आश्रय है।।चौथा कुछ गाना और गुनगुनाना है। माला औषधि है।। माला शब्द,स्पर्श,रूप,रस, और गंध से जुड़ी है।।अग्नि की गर्मी से रस निकलता है।नामरस कहो या रामरस कहो।। माला में बिना इत्र लगाइए भी खुशबू देता है।।जिस माला पर बहुत जप हो गए हो उसकी अपनी खुशबू होती है। रियाज भी भजन प्रकट करता है। गुरु का उपकरण माला या बेरखा भी भजन प्रकट करता है भागवत में लिखा है कोई पुण्यात्मा साधु रहता हो उसके आसपास रहना।। तलाब में मेंढक निकले फिर भैंस नहीं गिरती, लेकिन भैंस गिरने से ही मेंढक भाग जाते हैं।।वैसे भजन आते ही संशय,भ्रम आदि मेंढक भाग जाते हैं।। सबके साथ समान व्यवहार करने से भजन पैदा होता है। कोई विशेष पर्व में अपनी औकात के अनुसार छोटा सा महोत्सव और नृत्य करने से भजन पैदा होता है।। विपरीत अवस्था में सबको समान दृष्टि में देखना भजन है।। ऐसे आचरण से स्पर्धा से मुक्ति, इर्षा से मुक्ति,अहंकार से मुक्ति होगी।।लेकिन तुलसी कहते हैं इनमें से एक भी आचरण मेरे में नहीं मैं सिर्फ नाम लेता हूं।।
कथा प्रवाह में राम जन्म के बाद नामकरण संस्कार विद्या संस्कार और बाद में विश्वामित्र जी यज्ञ रक्षा के लिए दशरथ के पास राम लक्ष्मण को मांगने आते हैं और राम लक्ष्मण को लेकर निकलते हैं तब लीला शुरू करते हुए एक ही बाण से राम ताड़का को निर्वाण देते हैं।।और यात्रा जनकपुर की तरफ चलती है।।

