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वाधवानी फाउंडेशन 2030 तक 25 लाख नौकरियां पैदा करने और 60 लाख लोगों को रोजगार दिलाने के लिए राज्य और शहर स्तर पर अपनी पकड़ और सक्रियता बढ़ाएगा

फाउंडेशन साल 2026 में भारत में अपने निवेश को लगभग 25% बढ़ाएगा और अपनी टीम का 10% विस्तार करेगा। इसका उद्देश्य राज्य और शहर स्तर पर काम को मजबूत कर नौकरियां पैदा करने की गति तेज करना है। इसके साथ ही, फाउंडेशन देशभर में अपने सभी कार्यक्रम जारी रखेगा।


नई दिल्ली | 28 जनवरी 2026 — वाधवानी फाउंडेशन एक वैश्विक गैर-लाभकारी संस्था है, जो उद्यमिता, कौशल विकास, नवाचार और सरकारी डिजिटल कायाकल्प के जरिए रोजगार सृजन पर काम करती है। अब यह संस्था भारत में अपने विकास के अगले चरण में प्रवेश कर रही है। इसके तहत उत्तर प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र और तमिलनाडु के 15 चुनिंदा शहरों में जमीनी स्तर पर काम को मजबूत किया जाएगा।

इसका मुख्य उद्देश्य नतीजों का दायरा बढ़ाकर बेहतर परिणाम हासिल करना है, ताकि राष्ट्रीय स्तर की योजनाओं का लाभ स्थानीय लोगों तक पहुँच सके। बेहतर परिणामों का मतलब है स्थानीय स्तर पर अधिक नौकरियां और अधिक युवाओं को रोजगार मिलना। यह नया तरीका काम को तेजी से पूरा करने, जिम्मेदारी तय करने और स्थानीय कंपनियों, शिक्षण संस्थानों तथा रोजगार के अवसरों के बीच बेहतर तालमेल बिठाने में मदद करता है।

यह नया कदम साल 2025 में मिली मजबूत सफलता पर आधारित है। पिछले एक साल के दौरान, फाउंडेशन ने भारत में 300 करोड़ रुपये का निवेश किया, 7,000 व्यवसायों की मदद की, 1.2 लाख छात्रों को उद्यमिता से जोड़ा और 2.5 लाख युवाओं को रोजगार-परक कौशल से लैस किया। इसके साथ ही, फाउंडेशन ने शिक्षा मंत्रालय के साथ मिलकर एआई-सक्षम ‘माय करियर एडवाइजर’ प्लेटफॉर्म शुरू किया है। यह प्लेटफॉर्म युवाओं को 1,500 से अधिक करियर विकल्पों के लिए मुफ्त और व्यक्तिगत मार्गदर्शन देता है।

इनोवेशन के तहत, फाउंडेशन ने वाधवानी इनोवेशन नेटवर्क को और मजबूत किया है, जिसके तहत 10 इनोवेशन ट्रांसलेशन सेंटर संचालित किए जा रहे हैं। इनमें आईआईटी कानपुर (वाधवानी एआई और इंटेलिजेंट सिस्टम हब) और आईआईटी बॉम्बे (वाधवानी हेल्थ और बायो हब) में दो मुख्य सुपर हब शामिल हैं। ये हब मिलकर पूरे नवाचार तंत्र में 50 से अधिक ट्रांसलेशन केंद्रों को सहयोग देते हैं। कुल मिलाकर, 100 शोध परियोजनाओं को उत्पाद और स्टार्टअप की राह पर आगे बढ़ाया गया है।

इसके अलावा, छह केंद्रीय मंत्रालयों के लिए एआई प्रोजेक्ट्स पूरे किए गए और आशा (अन्‍न सहायता होलिस्टिक एआई सॉल्‍यूशन) प्लेटफॉर्म लॉन्च किया गया ताकि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के लाभार्थियों से फीडबैक लिया जा सके। साथ ही, स्वास्थ्य, कृषि और शिक्षा के क्षेत्र में 30 से अधिक एआई समाधान लागू किए गए।

इस सफलता को देखते हुए, फाउंडेशन 2026 में भारत में अपने निवेश को लगभग 25% बढ़ाएगा और अपनी टीम में भी 10% की बढ़ोतरी करेगा। फाउंडेशन अपनी राष्ट्रीय योजनाओं और स्थानीय स्तर की टीमों के तालमेल से काम करेगा और सरकारों, संस्‍थानों, कंपनियों एवं स्‍थानीय तंत्र के साथ साझेदारियों को मजबूत करेगा।

अधिकतम प्रभाव के लिए फाउंडेशन एक दोहरे मॉडल पर काम करेगा, जिसमें इसके राष्ट्रीय प्लेटफॉर्म बड़े स्तर पर निरंतरता बनाए रखेंगे, जबकि राज्य और शहर की टीमें जमीनी स्तर पर काम को पूरा करने, आपसी तालमेल और जवाबदेही सुनिश्चित करने का काम करेंगी। राज्य स्तर पर इस संचालन को मजबूती देने के लिए कुछ भूमिकाओं का नए सिरे से समायोजन भी किए जाएंगे। फाउंडेशन के सभी कार्यक्रम पार्टनर्स और लाभार्थियों के लिए पहले की तरह पूरी तरह से मुफ्त रहेंगे।

वाधवानी फाउंडेशन के सीईओ और बोर्ड सदस्य डॉ. अजय केला ने कहा, “हमारा मुख्य लक्ष्य बड़े स्तर पर रोजगार पैदा करना और लोगों की आजीविका में सुधार करना है। साल 2025 की शानदार सफलता को देखते हुए, हम 2026 में अपना निवेश बढ़ा रहे हैं और भारत में अपनी टीम का विस्तार कर रहे हैं ताकि राज्यों और शहरों में काम को और मजबूती दी जा सके। इससे नतीजों की रफ्तार बढ़ेगी, स्थानीय स्तर पर अधिक नौकरियां पैदा होंगी और अधिक कुशल युवाओं को उन नौकरियों से जोड़ा जा सकेगा। इससे हम 2030 के अपने लक्ष्यों की ओर आगे बढ़ेंगे।”

स्थानीय स्तर पर गहरा प्रभाव डालने और उसे बनाए रखने के उद्देश्य से, वाधवानी फाउंडेशन उद्यमिता, कौशल विकास, एसएमबी की वृद्धि, नवाचार और सरकारी डिजिटल परिवर्तन से जुड़े अपने सभी कार्यक्रमों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

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